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इस रचना को चरक संहिता के नाम से जाना जाता है। चरक संहिता में जहां रोगों और उसके उपचार का वरà¥à¤£à¤¨ है, वहीं सà¥à¤¶à¥à¤°à¥à¤¤ संहिता में शलà¥à¤¯ चिकितà¥à¤¸à¤¾ का उलà¥à¤²à¥‡à¤– है।
आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ कà¥à¤¯à¤¾ है?
पà¥à¤°à¤•ृति आधारित इस पà¥à¤°à¤¾à¤¤à¤¨ चिकितà¥à¤¸à¤¾ पदà¥à¤§à¤¤à¤¿ में शारीरिक संरचनाओं, पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤“ं और बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤¾à¤‚ड के ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ के समनà¥à¤µà¤¯ के सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚त पर इलाज का पà¥à¤°à¤¾à¤µà¤¿à¤§à¤¾à¤¨ है।
इतिहास
माना जाता है कि आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ का जनà¥à¤® ईसा पूरà¥à¤µ दूसरी शताबà¥à¤¦à¥€ में हà¥à¤†à¥¤ इसकी आधारशिरà¥à¤²à¤¾ हिंदू दारà¥à¤¶à¤¨à¤¿à¤• विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ वैशेषिक और तरà¥à¤• विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ में रखी गई। यह अà¤à¤¿à¤µà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की रूपरेखा से à¤à¥€ जà¥à¥œà¥€ है, जिसे समाखà¥à¤¯à¤¾ के नाम से जाना जाता है। समाखà¥à¤¯à¤¾ की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ à¤à¥€ उसी समय हà¥à¤ˆ थी जब वैशेषिक और नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯à¥‹à¤‚ का बोलबाला था। वैशेषिक विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯à¥‹à¤‚ में रोगों की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ की पà¥à¤¾à¤ˆ होती थी, जबकि नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯à¥‹à¤‚ में इलाज शà¥à¤°à¥‚ करने से पहले मरीज और रोग की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ के बारे में पà¥à¤¾à¤¯à¤¾ जाता था। वैशेषिक विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ किसी ततà¥à¤µ को छह पà¥à¤°à¤•ार में विà¤à¤•à¥à¤¤ करते हैं-दà¥à¤°à¤µà¥à¤¯, विशेष, करà¥à¤®, सामानà¥à¤¯, समावà¥à¤¯à¤¯ और गà¥à¤£à¥¤ बाद में वैशेषिक और नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯à¥‹à¤‚ का विलय हो गया और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ नà¥à¤¯à¤¾à¤¯-वैशेषिक विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ के नाम से जाना जाने लगा। नà¥à¤¯à¤¾à¤¯-वैशेषिक विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯à¥‹à¤‚ ने ही पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ जà¥à¤žà¤¾à¤¨ को विसà¥à¤¤à¤¾à¤° दिया और आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ के पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤°-पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤° में बड़ी à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤ˆà¥¤ इन सà¥à¤•ूलों की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ से पहले और आज à¤à¥€ आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ का जनक पृथà¥à¤µà¥€ की रचना करने वाले à¤à¤—वान बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤¾ को माना जाता है।
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